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Health : India COVID-19 Status (Data Story)

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चीन के हुबेई प्रान्त के वुहान शहर से शुरू हुए, कोरोनावायरस ने पूरी दुनिया में अपने पैर पसार लिए है.पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस से जूझ रहा हैं.अब तक पूरे विश्व में इस जानलेवा वायरस से 15 लाख से अधिक लोग संक्रमित है,औऱ 1 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.मानव जाति के लिए खतरा बने, इस वायरस ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है.अभी भी स्थिति नियंत्रण में नहीं है. भारत में इस महामारी का पहला संक्रमित व्यक्ति 30 जनवरी को मिला था.धीरे-धीरे महामारी का संक्रमण पूरे देश के लगभग सभी राज्यों में फैल गया.महामारी के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में 24 मार्च से 21 दिनों का लॉक डाउन घोषित किया गया.लॉक डाउन के बावजूद संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती रही.                      (Data Sources: data.gov.in) वर्तमान में भारत में कुल 7367 एक्टिव केस,715 मरीजों की रिकवरी औऱ 273 लोगों की मौत हो चुकी है. अब विभिन्न राज्यवार आंकड़ों का अध्ययन प्रस्तुत है.जिनमें देश में सर्वाधिक प्रभावित,सबसे कम प्रभावित औऱ सर्वाधिक मौत व रिकवरी वाले राज्यों औऱ ...

ICC Women's T20 World Cup 2020

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वर्ल्डकप में भारतीय टीम का प्रदर्शन.                     पहला मैच ऑस्ट्रेलिया के साथ 21 फरवरी को खेला गया. जिसमें भारत ने 17 रन से जीत दर्ज की. प्लेयर ऑफ द मैच पूनम यादव ने 4 ओवर में 19 रन देकर 4 विकेट लिए. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट खोकर 132 रन बनाए. जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम 20 ओवर में 115 रन पर ऑल आउट हो गई.                ****  दूसरा मैच बांग्लादेश के साथ 24 फरवरी को खेला गया.  इस मैच में भारत ने 18 रन से जीत दर्ज की. प्लेयर ऑफ द मैच शेफाली वर्मा ने 17 गेंदों में 4 छक्कों औऱ 2 चौकों की मदद से 39 रन बनाए. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट खोकर 142 रन बनाए. जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 8 विकेट गंवाकर 124 रन ही बना पाई.                     **** तीसरा मैच न्यूज़ीलैंड के साथ 27 फरवरी को खेल गया. भारत 3 रनों से विजयी हुआ. प्लेयर ऑफ द मैच शेफाली वर्मा ने 34 गेंदों में 2 छक्कों औऱ 4...

दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा में अबतक हुई कार्रवाही!

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                                 (फाइल फोटो) उत्तर-पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून के समर्थन और विरोध में 24 और 25 फरवरी को सांप्रदायिक हिंसा हुई. जिसमें कई लोगों की दुकानें और मकान आग से तबाह हो गए. इस हिंसा की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दो विशेष जांच दल बनाए हैं. रविवार तक कुल 702 केस दर्ज किए गए और 2387 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस हिंसा में कुल 53 लोगों की मौत हुई और 400 लोग घायल हुए थे. यह हिंसा मौजपुर और जाफराबाद के 2 किलोमीटर के दायरे में हुई. (स्त्रोत:हिंदुस्तान टाइम्स, 09.03.2020, 18:09 IST)                                    [ फाइल फोटो ]                                                               ...

मध्यप्रदेश की राजनीति में सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के मायने!

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              कांग्रेस की राजनीति और मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश का जो सियासी घटनाक्रम/ड्रामा चल रहा है, वो अचानक पैदा नहीं हुआ है. इसकी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी,जनता के सामने अब आई है.दरअसल पूरा खेल राज्यसभा सीटों औऱ कांग्रेस के युवा नेताओं की महत्वकांक्षा का है.तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में दिसम्बर 2018 में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस ने चुनाव जीता. वास्तव में खेल वंही से शुरू हो गया. (दिसम्बर18 में चुनाव जीतने के बाद) (दिसम्बर18 में चुनाव जीतने के बाद) दिसम्बर 18 में चुनाव जीतने के बाद बारी थी, इन राज्यों में मुख्यमंत्री नियुक्त करने की.अध्यक्ष के तौर पर यह कार्य राहुल गांधी का था,लेकिन सोनिया गांधी ने इसमें भरपूर हस्तक्षेप की.नतीजा यह हुआ कि मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों ही राज्यों में सोनिया गांधी ने अपने खास औऱ विश्वासपात्र नेताओं क्रमशः कमलनाथ औऱ अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री चुना.इससे इन राज्यों का युवा नेतृत्व निराश हुआ.ज्योतिरादित्य सिंधिया औऱ सचिन पायलट दोनों का ही अपने राज्यों में अच्छा ख...

सवालों के घेरे में दिल्ली पुलिस!

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दिल्ली हिंसा और कटघरे में पुलिस (File photo) 24 और 25 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा या यूं कहें कि सांप्रदायिक हिंसा को रोकने में दिल्ली पुलिस पूरी तरह से नाकाम हुई.अब लगातार विपक्ष और अन्य लोगों द्वारा दिल्ली पुलिस की भूमिका पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं. लगातार एक ही प्रश्न बना हुआ है कि आखिर दिल्ली पुलिस हिंसा क्यों नहीं रोक सकी? यह पहला मौका नहीं है, जब दिल्ली पुलिस पर प्रश्न उठ रहे है इससे पहले भी कई मौकों पर दिल्ली पुलिस पर सवालिया निशान लग चुके हैं. गौरतलब है कि दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी औऱ जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रों के बीच हुए विभिन्न तनावों औऱ नागरिकता कानून के विरोध में हुई हिंसा पर भी दिल्ली पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है. (File photo) 5 जनवरी 2020 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ नकाबपोश गुंडों ने छात्र-छात्राओं के हॉस्टल में घुसकर मारपीट की. जिसके कई वीडियो सामने आए, जिसमें बाहर से आए लोग छात्रों के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं. जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष और छात्रों ने बताया कि पुलिस विश्वविद्या...

क्या केजरीवाल राजनीति सीख गए है?

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क्या केजरीवाल राजनीति में सफल हो रहे हैं? (फ़ाइल फ़ोटो) देश में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से चर्चा में आये अरविंद केजरीवाल कभी खुद कहा करते थे कि राजनीति बहुत गंदी चीज है.इसमें सुधार होना चाहिए, क्या कारण है कि कुर्सी पर बैठने वाला कोई भी नेता, कुर्सी से हटना ही नहीं चाहता?एक समय था जब केजरीवाल कहते थे कि हम(आंदोलनकारी) कभी राजनीति में नहीं आएंगे.इसे बाहर से ही ठीक करना होगा. इतना सब कहने औऱ मानने वाले अरविंद केजरीवाल ने आखिर अपनी (AAP) पार्टी बनाई औऱ चुनावी मैदान में कूद गए. 2013 में जब पार्टी बनाई, तब केजरीवाल कहते थे, हम राजनीति को बदलने आए है। हम साफ-सुथरी राजनीति करेंगे। 2015 में जब आम आदमी पार्टी 67 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ जीतकर आयी, तो लोगों में एक नई उम्मीद जागी औऱ जनता की केजरीवाल से अपेक्षाएं बढ़ गयी।लेकिन देखते ही देखते केजरीवाल धीरे-धीरे बदलने लगे। राजनीति में प्रत्येक पार्टी औऱ नेताओं का किसी एक ही विषय को लेकर अपना अलग मत हो सकता है.प्रारम्भ में केजरीवाल केंद्र सरकार के प्रत्येक फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया या विरोध बढ़-चढ़कर दर्ज कराते थे.जब सितम्बर 2016...

दिल्ली में केजरीवाल की जीत के मायने!

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दिल्ली में केजरीवाल की जीत के मायने! दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए 8 फरवरी को मतदान हुआ, जिसमें कुल 62.59 प्रतिशत मत पड़े। 11 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आए जिसमें आम आदमी पार्टी को 62 तथा भारतीय जनता पार्टी को 8 तथा कांग्रेस पार्टी को 0 सीट प्राप्त हुई। दिल्ली चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही दिल्ली में चुनाव प्रचार तेजी से आगे बढ़ा। प्रारंभ में आम आदमी पार्टी  ने जोर-शोर से चुनाव प्रचार किया और थोड़े समय बाद बीजेपी भी आक्रामक रूप में उतर आई। दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी का मुद्दा मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा  औऱ महिलाओं की सुरक्षा,बुजुर्गों की तीर्थ यात्रा एवं साफ-सुथरी राजधानी का था। वंही भारतीय जनता पार्टी इन मुद्दों पर बात तो कर रही थी लेकिन साथ में वह शाहीन बाग़ को भुनाकर अपने पक्ष में माहौल बनाना चाह रही थी, जो कि बिल्कुल उल्टा पड़ गया। संभवत, यह पहला चुनाव था जिसमें किसी मुख्यमंत्री ने जनता के सामने आकर स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर मैंने काम किया है, तो मुझे वोट देना नहीं तो नहीं। और इसी का परिणाम है कि दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल के काम-का...